Kabir Saheb's Leela in kalyug

“मृत लड़के कमाल को जीवित करना”





शेखतकी महाराजा सिकंदर से मुख चढ़ाए फिर रहा था। सिकंदर ने पूछा कि क्या बात
है पीर जी? शेखतकी ने कहा कि क्या तुझे बात नहीं मालूम? सिकंदर ने पूछा कि क्या बात
है? शेखतकी ने कहा कि इस कबीर काफिर को साथ किसलिए रखा है? सिकंदर ने कहा
कि ये तो भगवान (अल्लाह) है। शेखतकी ने कहा कि अच्छा अल्लाह अब आकार में आने
लग गया। अल्लाह कैसे है? सिकंदर ने कहा कि पहले तो अल्लाह ऐसे कि मेरा रोग ऐसा
था कि किसी से भी ठीक नहीं हो पा रहा था। इस कबीर प्रभु ने हाथ ही लगाया था मैं स्वस्थ
हो गया। शेखतकी ने कहा कि ये जादूगर होते हैं। सिकंदर ने फिर कहा दूसरा भगवान ऐसे
है कि मैंने उनके गुरुदेव का सिर काट दिया था और उन्होंने उसे मेरी आँखों के सामने तुरंत
जीवित कर दिया। शेखतकी ने कहा कि अगर यह कबीर अल्लाह है तो मैं इसकी परीक्षा
लूँगा। यदि कबीर जी मेरे सामने कोई मुर्दा जीवित करे तो  अल्लाह मान लूँगा। नही
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तो दिल्ली जाकर मैं पूरे मुसलमान समाज को कह दूँगा कि यह राजा हिन्दू हो गया है।
सिकंदर लोधी डर गया कि कहीं ऐसा न हो कि यह जाते ही राज पलट दे। (राज को देने
वाला पास बैठा है और उस मूर्ख से डर लगता है।) राजा ने शेखतकी से कहा कि आप कैसे
प्रसन्न होंगे। शेखतकी ने कहा कि मैं तब प्रसन्न होऊँगा जब मेरे सामने यह कबीर कोई मुर्दा
जीवित कर दे। साहेब से प्रार्थना हुई तो कबीर साहेब ने कहा कि ठीक है। (कबीर साहेब
ने सोचा कि यह अनाड़ी आत्मा शेखतकी है। अगर यह मेरी बात मान गया तो आधे से
ज्यादा मुसलमान इसकी बात स्वीकार करते हैं। क्योंकि यह दिल्ली के बादशाह का पीर है
और अगर यह सही ढंग से मुसलमानों को बता देगा तो बेचारी भोली आत्माएँ इन गुरूओं
पर आधारित होती हैं।)
इसलिए कहा कि ठीक है शेखतकी ढूँढ़ ले कोई मुर्दा। सुबह एक 10.12 वर्ष की आयु
के लड़के का शव पानी में तैरता हुआ आ रहा था। शेखतकी ने कहा कि वह आ रहा है मुर्दा,
इसे जिन्दा कर दो। कबीर साहेब ने कहा पहले आप प्रयत्न करो, कहीं फिर पीछे नम्बर
बनाओ। उपस्थित मन्त्रियों तथा सैनिकों ने कहा कि पीर जी आप कोशिश करके देख लो।
शेखतकी जन्त्रा-मन्त्रा करता रहा। इतने में वह मुर्दा तीन फर्लांग आगे चला गया। शेखतकी
ने कहा कि यह कबीर चाहता था कि यह बला सिर से टल जाए। कहीं मुर्दे जीवित होते हैं?
मुर्दे तो कयामत के समय ही जीवित होते हैं। कबीर साहेब बोले महात्मा जी आप बैठ जाओ,
शान्ति करो। कबीर साहेब ने उस मुर्दे को हाथ से वापिस आने का संकेत किया। बारह वर्षीय
बच्चे का मृत शरीर दरिया के पानी के बहाव के विपरित चलकर कबीर जी के सामने आकर
रूक गया। पानी की लहर नीचे-नीचे जा रही और शव ऊपर रूका था। कबीर साहेब ने
कहा कि हे जीवात्मा जहाँ भी है कबीर हुक्म से मुर्दे में प्रवेश कर और बाहर आ। कबीर साहेब
ने इतना कहा ही था कि शव में कम्पन हुई तथा जीवित होकर बाहर आ गया। कबीर साहेब
के चरणों में दण्डवत् प्रणाम किया। “बोलो कबीर परमेश्वर की जय”
सर्व उपस्थित जनों ने कहा कि कबीर साहेब ने तो कमाल कर दिया। उस लड़के का
नाम कमाल रख दिया। लड़के को अपने साथ रखा। अपने बच्चे की तरह पालन-पोषण
किया और नाम दिया। 

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